वास्तविकता तथा हकीकत में अंतर

“वास्तविकता तथा हक़ीक़त में अंतर” एक ऐसी पुस्तक है जो आज के समाज की उस सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ इंसान अपनी गलतियों को नज़रअंदाज़ कर देता है और दूसरों की अच्छाइयों को स्वीकार नहीं कर पाता। यह किताब पाठक को अपने अंतरमन से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और गीता के ज्ञान तथा महान लेखकों के विचारों के माध्यम से वास्तविकता और हक़ीक़त के बीच का सूक्ष्म अंतर समझाने का प्रयास करती है। यह एक आत्ममंथन की यात्रा है, जो आपको स्वयं को समझने और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की दिशा देती है।

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SKU: 9788199393929

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Rakhi Jha
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“वास्तविकता तथा हक़ीक़त में अंतर” किताब में कुछ ऐसी बातें लिखी गई हैं जो आजकल के समाज में बहुत प्रचलित हैं। हर किसी को अपनी गलती और दूसरों की अच्छाई एक साथ नहीं भाती, पर क्या वास्तव में ऐसा होता है? क्या हमारे अंतरमन को भी यही मंज़ूर है? नहीं, बिल्कुल नहीं।

इसी दुविधा को दूर करने और गीता के ज्ञान के साथ कुछ महान लेखकों के विचार आप तक प्रस्तुत करने के लिए एक अलौकिक प्रयास किया गया है। यह पुस्तक हर बात पर आपको स्वयं के किसी न किसी पहलू पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेगी और वास्तविकता तथा हक़ीक़त के बीच के अंतर को समझने में आपकी सहायता करेगी।


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